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Adani AGM: अडाणी ग्रुप के शेयरों गिरावट के लिए चेयरमैन गौतम अडाणी ने इन्हें बताया जिम्मेदार

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अडाणी ग्रुप के एजीएम में आज यानी सोमवार को चेयरमैन गौतम अडाणी ने उम्मीद जताई कि 2022 में उनका एजीएम व्यक्तिगत रूप से आमने-सामने बैठ कर होगी और उन्हें वास्तव में कुछ लोगों से हाथ मिलाने का अवसर मिलेगा। गौतम अडाणी ने पिछले दिनों कंपनी के बारे में आई मीडिया रिपोर्ट्स पर मीडिया घरानों को भी आड़ेहाथ लिया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा, और फिर अगले दो दशकों में 15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। आइए जानें एजीएम को संबोधित करते हुए गौतम अडाणी ने क्या-क्या खास बातें कहीं…

जब दुनिया के अन्य राष्ट्र इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए अपने संसाधन व्यवस्थित कर रहे थे, मैंने कई आलोचकों को भारत को घेरे में लेते हुए देखा, जिनका कहना था कि भारत अपने नागरिकों की रक्षा, विशेष रूप से टीकाकरण के लिए बहुत कुछ नहीं कर रहा है।
हमारा टीकाकरण का प्रयास 87 देशों के संयुक्त प्रयासों से बड़ा होना चाहिए, जबकि तथ्य यह है कि दुनिया भर में दी जाने वाली 320 करोड़ वैक्सीन की खुराक में से 35 करोड़ खुराक भारत में दी गई।
मैं मानता हूं कि आलोचना उचित है, लेकिन हमें ऐसी किसी बात से प्रेरित नहीं होना चाहिए जो हमारे देश का मनोबल गिराती हैं या असाधारण बलिदान देने वाले फ्रंटलाइन वकर्स का मनोबल तोड़ती हैं।
संकट की घड़ी में राष्ट्र का सहयोग करते समय हमने कितना किया जैसाकि हमारे जैसे कॉरपोरेट करते हैं, बल्कि इसके बजाय, यह कदम बढ़ाने के बारे में है ताकि हम सुनिश्चित कर सकें कि हम अपने हिस्से का काम कर रहे हैं।
राष्ट्र सेवा करने के हमारे कर्तव्य के बारे में हमें फ्रंटलाइन वकर्स के मुकाबले किसी और ने न तो अधिक प्रेरित नहीं किया है और न ही याद दिलाया है। महामारी के दुख-दर्द झेलते हुए, इन फ्रंटनलाइन वकर्स ने सेवा परमो धर्म: के महान भारतीय आदर्श का उदाहरण पेश किया।

हमारा योगदान भारतीय वायु सेना के सामने छोटा

अडाणी ग्रुप ने सारी दुनिया से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन, क्रायोजेनिक टैंक और ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी महत्वपूर्ण आवश्यक चीजें हासिल की, लेकिन हमारा योगदान भारतीय वायु सेना की हमारी महिलाओं और पुरुषों द्वारा किए गए प्रयासों की विशालता के सामने छोटा ही रहा है, जिन्होंने आवश्यक आपूर्ति लाने में हमारी मदद के लिए दिन-रात नजदीकी स्थानों से लेकर दूर-दराज के ठिकानों के लिए उड़ाने भरीं।

हमने अपने योगदान से पीएम केयर्स फंड को बढ़ावा दिया है, लेकिन पैसा कभी भी आम लोगों की व्यक्तिगत निस्वार्थता की बराबरी नहीं कर सकता है, जो अपने साथी भारतीयों की मदद के लिए अपनी जरूरतों से ऊपर उठे, जिन्हें वे कभी नहीं जानते थे और जिनसे वे फिर कभी नहीं मिलेंगे।

बिजनेस
Adani AGM: अडाणी ग्रुप के शेयरों गिरावट के लिए चेयरमैन गौतम अडाणी ने इन्हें बताया जिम्मेदार
लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Drigraj Madheshia
Mon, 12 Jul 2021 11:58 AM
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अडाणी ग्रुप के एजीएम में आज यानी सोमवार को चेयरमैन गौतम अडाणी ने उम्मीद जताई कि 2022 में उनका एजीएम व्यक्तिगत रूप से आमने-सामने बैठ कर होगी और उन्हें वास्तव में कुछ लोगों से हाथ मिलाने का अवसर मिलेगा। गौतम अडाणी ने पिछले दिनों कंपनी के बारे में आई मीडिया रिपोर्ट्स पर मीडिया घरानों को भी आड़ेहाथ लिया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा, और फिर अगले दो दशकों में 15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। आइए जानें एजीएम को संबोधित करते हुए गौतम अडाणी ने क्या-क्या खास बातें कहीं…

जब दुनिया के अन्य राष्ट्र इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए अपने संसाधन व्यवस्थित कर रहे थे, मैंने कई आलोचकों को भारत को घेरे में लेते हुए देखा, जिनका कहना था कि भारत अपने नागरिकों की रक्षा, विशेष रूप से टीकाकरण के लिए बहुत कुछ नहीं कर रहा है।
हमारा टीकाकरण का प्रयास 87 देशों के संयुक्त प्रयासों से बड़ा होना चाहिए, जबकि तथ्य यह है कि दुनिया भर में दी जाने वाली 320 करोड़ वैक्सीन की खुराक में से 35 करोड़ खुराक भारत में दी गई।
मैं मानता हूं कि आलोचना उचित है, लेकिन हमें ऐसी किसी बात से प्रेरित नहीं होना चाहिए जो हमारे देश का मनोबल गिराती हैं या असाधारण बलिदान देने वाले फ्रंटलाइन वकर्स का मनोबल तोड़ती हैं।
संकट की घड़ी में राष्ट्र का सहयोग करते समय हमने कितना किया जैसाकि हमारे जैसे कॉरपोरेट करते हैं, बल्कि इसके बजाय, यह कदम बढ़ाने के बारे में है ताकि हम सुनिश्चित कर सकें कि हम अपने हिस्से का काम कर रहे हैं।
राष्ट्र सेवा करने के हमारे कर्तव्य के बारे में हमें फ्रंटलाइन वकर्स के मुकाबले किसी और ने न तो अधिक प्रेरित नहीं किया है और न ही याद दिलाया है। महामारी के दुख-दर्द झेलते हुए, इन फ्रंटनलाइन वकर्स ने सेवा परमो धर्म: के महान भारतीय आदर्श का उदाहरण पेश किया।

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हमारा योगदान भारतीय वायु सेना के सामने छोटा

अडाणी ग्रुप ने सारी दुनिया से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन, क्रायोजेनिक टैंक और ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी महत्वपूर्ण आवश्यक चीजें हासिल की, लेकिन हमारा योगदान भारतीय वायु सेना की हमारी महिलाओं और पुरुषों द्वारा किए गए प्रयासों की विशालता के सामने छोटा ही रहा है, जिन्होंने आवश्यक आपूर्ति लाने में हमारी मदद के लिए दिन-रात नजदीकी स्थानों से लेकर दूर-दराज के ठिकानों के लिए उड़ाने भरीं।

हमने अपने योगदान से पीएम केयर्स फंड को बढ़ावा दिया है, लेकिन पैसा कभी भी आम लोगों की व्यक्तिगत निस्वार्थता की बराबरी नहीं कर सकता है, जो अपने साथी भारतीयों की मदद के लिए अपनी जरूरतों से ऊपर उठे, जिन्हें वे कभी नहीं जानते थे और जिनसे वे फिर कभी नहीं मिलेंगे।

हमने पूरे देश में वायु, समुद्र, रेल और सड़क मार्ग से लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की, और हजारों टन बेहद जरूरी आपूर्ति को गंतव्य स्थलों तक पहुंचाया, लेकिन जब हम इसकी तुलना अपने डॉक्टरों और नर्सों के अतुलनीय महान काम से करते हैं, तो यह कुछ भी नहीं है। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाल कर अपने साथी नागरिकों की सेवा की।

मानवता की व्यक्तिगत कहानियां दिल को छू लेने वाली हैं। हमने जो बलिदान देखे हैं, वे हृदय को झकझोर देने वाले रहे हैं, और इन सबके बीच से गुजरते हुए, हमने ऑक्सीजन वितरण और भर्ती किए गए रोगी की देखभाल में मदद करने की अपनी पूरी कोशिश की है, और इसके लिए हमारे अडाणी फाउंडेशन के लोगों ने संसाधनों और विशेषज्ञों को साथ लेकर योगदान दिया है।

उदाहरण के लिए, कुछ ही दिनों में, हमारी इंजीनियरिंग और मेडिकल टीमों ने अहमदाबाद स्थित अडाणी विद्या मंदिर स्कूल को एक इमरजेंसी केयर सेंटर में बदल दिया – जिसमें सैकड़ों बिस्तर, ऑक्सीजन सपोर्ट और भोजन व्यवस्था उपलब्ध थी। यह सचमुच ‘विद्या-दान से जीवन-दान’ था, क्योंकि हमारे स्कूल के शिक्षण-स्थल से जीवन-स्थल बन गए थे। इसी तरह, भुज और मुंद्रा में हमारे जनरल अस्पतालों को 100% कोविड-केयर अस्पतालों में बदल दिया गया था। मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं, और मैं उन्हें यह भी बताना चाहता हूं कि उन्होंने जो किया है और अब भी कर रहे हैं, उस पर मुझे बहुत गर्व है।

इसलिए मैं नर्सों, डॉक्टरों, पैरामेडिक्स, एम्बुलेंस ड्राइवरों, पुलिस बलों, सफाई कर्मचारियों, डिलीवरी कर्मियों, ट्रांसपोर्ट वकर्स और मेरे अपने अडाणी परिवार से जुड़े साथियों के सामने विनम्रता के साथ उपस्थित हूं, जिन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कि इन कठिन समय में जीवन जितना संभव है, सामान्य बना रहे, अपने कर्तव्य से ऊपर उठ कर काम किया।

एक कंपनी का परफॉरमेंस

पिछला वर्ष उन व्यवसायों के लिए असाधारण रूप से कठिन अवधि थी जिन्होंने इन अभूतपूर्व परिस्थितियों से गुजरते हुए अपनी बिल्कुल नई राह बनायी, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए सफर तय किया और अधिक मजबूत बनकर उभरे। और मुझे गर्व है कि वैश्विक महामारी के विध्वंसकारी धुंध में भी, हमारी छह सूचीबद्ध संस्थाएं मार्केट लीडरशिप, अडाप्टिव मैनेजमेंट और संस्थागत लाभप्रदता के प्रकाशस्तंभ के रूप में खड़ी रहीं।
हमारी सूचीबद्ध संस्थाओं के परफॉरमेंस के कारण इस नए वित्तीय वर्ष के पहले सप्ताह में हमारा पोर्टफोलियो मार्केट कैपिटलाइजेशन में 100 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। यह महत्वपूर्ण वैल्यूएशन किसी पहली पीढ़ी की भारतीय कंपनी के लिए पहली बार है।
आज हम जो निर्माण कर रहे हैं वह बेहतर कल की नींव है। इसके पीछे हमारे तीन प्राथमिक मूल्य हैं – साहस, भरोसा और प्रतिबद्धता। हमारी विकास यात्रा अभी शुरू ही हुई है, और यह हमारी सभी छह सूचीबद्ध संस्थाओं के परफॉरमेंस में दिखता है, जिन्होंने बाजार सूचकांकों से काफी ऊपर जाकर नतीजे प्रदान किए हैं।
वित्तीय वर्ष 2021 के लिए, हमारे सूचीबद्ध पोर्टफोलियो के लिए समेकित ईबीआईटीडीए (या ब्याज, टैक्स, डिप्रेसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की आय) 32,000 करोड़ रुपये से अधिक था, जो 22 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज किया है। अडाणी के सभी शेयरों ने 100 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दिया और हमारे बिजनेस ने सुनिश्चित किया कि हम आपको, हमारे इक्विटी शेयरहोल्डर्स को लगभग 9,500 करोड़ रुपये रिटर्न में दें। यह वर्ष-दर-वर्ष आधार पर प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में 166% की वृद्धि है।
लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग

अब मुझे आपका ध्यान हमारे दृष्टिकोण की तरफ आकर्षित करना चाहिए कि हम अपने निवेश को कैसे देखते हैं। हम इक्विटी के अंतर-पीढ़ी यानी इंटर-जेनेरेशनल होल्डर्स हैं। हम अपने भागीदारों, अपने अल्पसंख्यक निवेशकों और स्वयं के लिए दीर्घकालिक सस्टेनेबल वैल्यू के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हाल ही में, कुछ मीडिया घराने नियामकों की प्रशासनिक कार्रवाइयों से संबंधित लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग में शामिल रहे। इससे अडाणी के शेयरों के बाजार भाव में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव आया। दुर्भाग्य से, हमारे कुछ छोटे निवेशक इस विकृत रिपोर्टिंग से प्रभावित हुए, जिसमें कुछ टिप्पणीकारों और पत्रकारों ने यह अर्थ निकाला था कि कंपनियों के पास अपने शेयरहोल्डर्स के ऊपर नियामक शक्तियां हैं और कंपनियां डिसक्लोजर के लिए मजबूर कर सकती हैं।

लंबी अवधि में, इस तरह के डायवर्जन का हम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हम हमेशा एक आत्मविश्वासी संगठन रहे हैं जिसने ऐसी चुनौतियों का सामना किया है जिनकी सामना करने का साहस या कल्पना बहुत कम लोगों ने की होगी। हमें दी गई हर चुनौती हमें मजबूत और बेहतर ही बनाती है।

अडाणी पोर्ट्स

अडाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन ने खुद को पोर्ट्स कंपनी से एकीकृत पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स कंपनी में बदलना जारी रखा। वित्तीय वर्ष 2021 वास्तव में परिवर्तनकारी वर्ष था और एपीएसईज़ेड ने भारत के पोर्ट-आधारित कार्गो बिजनेस में अपनी हिस्सेदारी 25% तक बढ़ाने और कंटेनर सेगमेंट में बाजार हिस्सेदारी 41% तक बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। इसने आगे भी विविधता के साथ विकास जारी रखा और मुंद्रा में एलएनजी और एलपीजी कारोबार को और धामरा में एलएनजी ऑपरेशंस के साथ अपने पोर्टफोलियो का विस्तार किया। दुनिया में कोई भी अन्य कंपनी इस पैमाने और पहुंच के साथ पोर्ट बिजनेस का संचालन नहीं करती है।

अडाणी ग्रीन एनर्जी

अडाणी ग्रीन एनर्जी रिन्यूएबल एनर्जी के भविष्य को फिर से परिभाषित कर रही है। 2020 में, हम दुनिया की सबसे बड़ी सोलर कंपनी बन गए। सोलर कंपनी के रूप में हमने 2015 में यात्रा शुरू की थी। और पिछले महीने, एसबी एनर्जी के पांच-गीगावाट पोर्टफोलियो के अधिग्रहण के बाद, लगभग 3.5 बिलियन डॉलर के एंटरप्राइज वैल्यूएशन पर, हमने अपने रिन्यूएबल एनर्जी के 25 गीगावाट के लक्ष्य को निर्धारित समय से चार साल पहले हासिल कर लिया है। मैं दुनिया में किसी अन्य कंपनी या संगठन के बारे में नहीं जानता जिसने अडाणी ग्रुप जितनी तेजी से अपने रिन्यूएबल फुटप्रिंट्स में तेज वृद्धि दर्ज की हो।

अडाणी एंटरप्राइजेज

अडाणी एंटरप्राइजेज के जरिये, हमने एयरपोर्ट्स के क्षेत्र में कदम रखा और आज भारत में हर चार यात्रियों में से एक यात्री अडाणी एयरपोर्ट से उड़ान भरता है। किसी भी बड़े देश के किसी भी एयरपोर्ट बिजनेस ने कुल यात्री यातायात का 25% हिस्सा हासिल नहीं किया है। कंपनी ने अहमदाबाद, लखनऊ और मैंगलोर में एयरपोर्ट का ऑपरेशंस भी संभाला है तथा गुवाहाटी, जयपुर और तिरुवनंतपुरम के लिए रियायत समझौतों पर हस्ताक्षर किए, और अब मुंबई तथा नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया में है। अपने अखिल भारतीय एयरपोर्ट नेटवर्क को विकसित करने के अलावा, हम गैर-यात्री राजस्व को शामिल करने तथा फिजिकल और डिजिटल दोनों इंफ्रास्ट्रक्चर के भीतर संभावनाएं देखने पर भी अधिक ध्यान दे रहे हैं।

अडाणी ने कहा, ” हालांकि अपने बिजनेस परफॉरमेंस को लेकर हम संतुष्ट हैं, फिर भी मेरा मानना है कि हमारे तेज विकास का वास्तविक चरण अभी शुरु हो रहा है। ऐसा इसलिए कि हमारे ग्रुप को ऐसी कंपनियों के निवेश सूची से बहुत लाभ होता है जिनके पास विभिन्न क्षेत्रों में हमारे भविष्य के विकास को प्रोत्साहन देने वाली कई रणनीतिक निकटता हैं।”

‘अडाणी मॉडल’

अब हम जो भी बिजनेस करते हैं, यानी पोर्ट, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, प्राकृतिक संसाधन, थर्मल और रिन्यूएबल पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रिब्यूशन, डेटा सेंटर, रक्षा, कृषि और भोजन, रियल इस्टेट, सिटी गैस यूटिलिटीज, और कई अन्य, उनमें मेरा मानना है कि वे सभी स्वयं में उच्च विकास वाले बिजनेस हैं, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उनमें से प्रत्येक के पास स्वयं में निकटता हैं और इसके अलावा, उनके पास नए क्षेत्र भी हैं, जिनमें हम आगे बढ़ सकते हैं। यह बहुत ही विशिष्ट ‘अडाणी मॉडल’ है, जो बी2बी2सी की ब्रिजिंग क्षमता के साथ निकटता की शक्ति को जोड़ती है, जो हमें एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने में मदद करती है, जो हमारे लिए अनंत संभावनाओं के द्वार खोल देता है, विशेष रूप से इसकी संभावना तब और बढ़ जाती है, जब भारत जैसे आर्थिक पावरहाउस के सकारात्मक फैक्टर इसका पीछे से समर्थन कर रहे हों। मैं ऐसे किसी अन्य विकास मॉडल के बारे में नहीं जानता जो अगले कई दशकों तक असीमित बी2बी और बी2सी बाजार में अभूतपूर्व और लगातार बढ़ती हुई पहुंच प्रदान करता हो।

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