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महंगाई की दौड़ में तेल, पेट्रोल और रसोई गैस सबसे आगे,बढ़ते रेटों से आमजन के छूटे पसीने

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बेकाबू होती महंगाई से जनता में हाहाकार मचा हुआ है। घर के मासिक बजट को व्यवस्थित करने के लिए लोगों ने अपने अन्य खर्चों में कटौती शुरू कर दी है, मगर हर महीने बढ़ती महंगाई से जनता परेशान हो चुकी है। इस साल की शुरुआत से अब तक सबसे ज्यादा पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल और रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा हुआ है। सब्जी और दालें खरीदने में लोग इतना संकोच नहीं कर रहे हैं, जितना कि खाना पकाने में। खाद्य तेलों के दाम बीते 6 महीने में 40-50 रुपये तक बढ़े हैं। हालांकि, इस बीच रिफाइंड ऑयल के दामों में 10 रुपये गिरावट हुई है। वहीं पेट्रोल-डीजल के दाम तो हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। इस वजह से ट्रांसपोर्टेशन महंगा हुआ है। इसका असर दाल, मसाले सहित अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी देखा जा सकता है। अभी इनकी कीमतों में कोई राहत मिलेगी, ऐसे आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

पेट्रोल-डीजल
पेट्रोल और डीजल के दाम वस्तुओं की कीमतों पर असर डालते हैं। एक जनवरी 2021 की बात करें तो पेट्रोल 83.59 रुपये प्रति लीटर, डीजल 73.90 रुपये प्रति लीटर था। आज पेट्रोल की कीमत 96.75 रुपये, डीजल 89.95 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। ऐसे में पेट्रोल 13.16 रुपये प्रति लीटर-डीजल 16.05 रुपये/लीटर महंगा हुआ।

खाद्य तेल
पेट्रोल-डीजल की तरह खाद्य तेलों ने भी लोगों को रुलाया है। जनवरी से पहले 125-135 रुपये प्रति लीटर तक बिकने वाला सरसों तेल 185 रुपये तक है। रिफाइंड जहां 90-110 रुपये में बिकता था, उसके दाम अब 150-160 रुपये तक हैं। ऐसे में सरसों तेल और रिफाइंड ऑयल 50 रुपये तक महंगे हुए हैं।

रसोई गैस
रसोई गैस के दामों में होती वृद्धि से लोग परेशान हैं। घरों के अलावा यह होटल और रेस्तरां पर भी असर डाल रहे हैं। जनवरी में घरेलू सिलेंडर 714.50 रुपये का था, अब कीमत 855 रुपये हो गई है। ऐसे में कीमत छह महीने में 140.50 रुपये बढ़ी है। अब लोगों के प्याज काटने में नहीं, गैस सिलेंडर खरीदने में आंसू निकल रहे हैं।

दूध
प्रतिष्ठित कंपनियों के दूध में भी उछाल आना लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ब्रांडेड कंपनी प्रति लीटर दूध की कीमत में एक से दो रुपये तक बढ़ा सकती है। अगर ऐसा होगा तो, पहले से ही मंहगाई की मार झेल रहे आमजन की मुश्किलें तो बढ़ना तय है।
वाहन
कोरोना अटैक के बाद हल्द्वानी में लोग सार्वजनिक परिवहन से दूरियां बनाते हुए निजी वाहनों में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। पिछले साल भी इस बात को देखा गया था और अनलॉक के बाद जमकर गाड़ियां बिकी थीं। मगर, इस साल की शुरुआत से कार और बाइक की कीमतें तीन बार बढ़ चुकी है। जनवरी, अप्रैल और फिर जुलाई में फोर व्हीलर में 35000 रुपये और टू व्हीलर पर 3000 तक अलग-अलग बार बढ़े हैं। यह पहला मौका है, जब छह महीने में तीन बार गाड़ियों के दाम बढ़े हों। इसकी वजह स्टील और ऑटो पाट्र्स महंगे होना है।
एलपीजी गैस, राशन सभी महंगा है। ऊपर से कोरोना की दूसरी लहर से काम बंद रहा। अभी स्थितियां सामान्य तो हैं, मगर सामान महंगा होने से औसत नहीं आ रहा है। नो प्रॉफिट नो लॉस में काम चल रहा है।
पंकज जायसवाल, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन

इस बीच उत्पादों की कीमतें बढ़ने का सिलसिला थमा हुआ है, मगर सबसे ज्यादा सरसों तेल और रिफाइंड ऑयल महंगा हुआ है। दालों की कीमतों में में भी 10 से 20 रुपये तक इजाफा हुआ है। इस बीच कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और संकेत मिल रहे हैं कि अगले महीने से कुछ राहत मिले।
शलभ मित्तल, व्यापारी

लगातार गैस सिलेंडर और पेट्रोल के दाम बढ़ते रहे हैं। इसका असर खाद्य उत्पादों और अन्य वस्तुओं पर भी पड़ रहा है। कोरोना काल में महंगाई की मार से लोग परेशान हैं। सरकार को ठोस पॉलिसी लानी चाहिए, ताकि कुछ राहत मिले।
योगेन्द्र नेगी, व्यापारी

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