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भारत ही नहीं, अमेरिका और ब्रिटेन पर भी महंगाई की मार, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची मुद्रास्फीति

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कोरोना के कहर का सामना कर रहे दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था महामारी से बाहर आ रही है तो महंगाई की सुरसा की मुंह की तरह बढ़ रही है। अधिकतर देशों में वहां की जनता महंगाई की मार झेल रही है। भारत के साथ ही अमेरिका और ब्रिटेन में महंगाई रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। ब्रिटेन में आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक खाद्य वस्तुओं और मोटर ईंधन के दामों में बढ़ोतरी के चलते महंगाई लगभग तीन सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। जबकि, मेरिका में थोक मुद्रास्फीति जून में एक फीसद बढ़ी और पिछले 12 महीने की तुलना में रिकॉर्ड 7.3 फीसद पर पहुंच गयी। वहीं, भारत की बात करें तो यहां थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) जून में मामूली रूप से घटकर 12.07 फीसद रह गई। हालांकि, डब्ल्यूपीआई जून में लगातार तीसरे महीने दोहरे अंकों में रही।

ब्रिटेन में 2018 के बाद सबसे अधिक महंगाई
ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार को कहा कि मुद्रास्फीति की वार्षिक दर जून में बढ़कर 2.5 फीसद हो गई, जो इससे पिछले महीने 2.1 फीसद थी। जून की दर अगस्त, 2018 के बाद सबसे अधिक है, जब मुद्रास्फीति 2.7 फीसद हो गई थी। मुद्रास्फीति की दर बैंक ऑफ इंग्लैंड के दो फीसद के लक्ष्य से काफी अधिक है, जिसके बाद अनुमान जताया जा रहा है कि ब्रिटेन का केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में कीमतों के दबाव को कम करने के लिए जल्द कोई कदम उठा सकता है।
महंगाई की मार से अमेरिका भी त्रस्त

कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप से उबरने के बाद दुनिया के कई देश मुद्रास्फीति में तेजी से बढ़ोतरी का अनुभव कर रहे हैं। अमेरिका में मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वहां वार्षिक मुद्रास्फीति दर 13 साल के उच्च स्तर 5.4 फीसद पर पहुंच गई है। वहीं, थोक मुद्रास्फीति जून में एक फीसद बढ़ी और पिछले 12 महीने की तुलना में रिकॉर्ड 7.3 फीसद पर पहुंच गयी।

श्रम विभाग ने बुधवार को कहा कि जून में उत्पादक कीमत सूचकांक बढ़ा है। यह ग्राहकों के पास सामान पहुंचने से पहले महंगाई दर को मापता है। इससे पहले, मई में 0.8 फीसद की वृद्धि हुई थी। जून में सूचकांक में वृद्धि जनवरी में 1.2 फीसद की वृद्धि के बाद सर्वाधिक है।

आपूर्ति की कमी और बाधाओं से बढ़ रही महंगाई

आंकड़े के अनुसार जून में थोक महंगाई दर सालाना आधार पर 7.3 फीसद रही। यह सरकार द्वारा 2010 में थोक कीमतों पर मौजूदा श्रृंखला शुरू करने के बाद से 12 महीने की सबसे बड़ी वृद्धि है। मई में थोक मुद्रास्फीति 6.6 फीसद थी। इससे पहले, मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि उपभोक्ता कीमत में जून में 0.9 फीसद की वृद्धि हुई है और पिछले 12 महीने की तुलना में बढ़कर 5.4 फीसद रही। मुद्रास्फीति में वृद्धि ऐसे समय हुई है, जब अर्थव्यवस्था महामारी से बाहर आ रही है और आपूर्ति की कमी और बाधाओं के बीच उपभोक्ता मांग बढ़ रही है। इससे कीमत चढ़ी है।

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