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सिजेरियन के बाद क्या ब्रेस्टफीडिंग में होती है कोई परेशानी? जानें ऐसे ही पांच सवालों के जवाब

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आमतौर पर लोगों खासतौर पर महिलाओं के मन में नॉर्मल डिलीवरी से अलग सिजेरियन से मां बनने को लेकर कई तरह की कंफ्यूजन होती है। उन्हें लगता है नॉर्मल डिलीवरी से अलग अगर किसी महिला की सिजेरियन (सी सेक्शन) होती है, तो उसे आगे जाकर कई हेल्थ इश्यू हो सकते हैं जबकि मेडिकल एक्सपर्ट ऐसा नहीं मानते। आइए, जानते हैं सिजेरियन से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई-

मिथक : सिजेरियन डिलीवरी में बिल्कुल भी दर्द नहीं होता
सच : बच्चे को जन्म देने में दर्द होता ही है।फिर चाहे सिजेरियन हो या नॉर्मल डिलीवरी।ऐसे में बस फर्क इतना होता है कि एनेस्थेसिया देने की वजह से ऑपरेशन करते वक्त दर्द नहीं होता लेकिन जैसे-जैसे एनेस्थेसिया का असर खत्म होने लगता है, तो दर्द बढ़ता जाता है। ऐसे में दोनों ही तरह की डिलीवरी में 10-15 दिनों तक दर्द, असहजता की स्थिति बनी रहती है।

मिथक : सिजेरियन होने के बाद दूसरा बच्चा कभी नॉर्मल डिलीवरी से नहीं होता।
सच : यह बात बिल्कुल भी सही नहीं है।सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए कई मेडिकल कंडीशन को देखकर ही फैसला लिया जाता है कि गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी होगी या नॉर्मल।वहीं, बच्चे को जन्म देने की कॉम्पलिकेशन को भी देखा जाता है।
मिथक : सिजेरियन से मां-बच्चे की सेहत पर असर पड़ता है।

सच : ऐसा कुछ भी नहीं है कि सिजेरियन के बाद मां और बच्चे पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।नॉर्मल या सिजेरियन दोनों ही तरह की डिलीवरी में मां और बच्चे दोनों को प्यार और एक्सट्रा केयर की जरुरत होती है।

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