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69000 शिक्षक भर्ती मामला: CM आवास पहुंचे रोते-बिलखते अभ्‍यर्थी, बसों में भरकर पुलिस ने धरना स्‍थल पर भेजा

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69000 शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षण घोटाले का आरोप लगाते हुए मंगलवार सुबह अभ्‍यर्थी रोते-बिलखते लखनऊ स्थित मुख्‍यमंत्री आवास पहुंच गए। उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री आवास के सामने ‘योगी जी न्‍याय दो’का नारा लगाना शुरू कर दिया। सीएम आवास पर बड़ी संख्‍या में मौजूद पुलिस बल ने माहौल बिगड़ता देखा तो बसों में भरकर अभ्‍यर्थियों को धरना स्‍थल (इको गार्डन) भेज दिया।

गौरतलब है कि 69000 शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षण घोटाले का आरोप लगाते हुए पिछले कई दिनों से अभ्‍यर्थी लखनऊ के अलग-अलग हिस्‍सों में प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते दिन इन्‍हीं अभ्‍यर्थियेां पर लाठीचार्ज हुआ था। आज फिर वे अपना हक मांगने सीएम आवास पर पहुंचे। कुछ अभ्‍यर्थियों ने सड़क पर लेटकर विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच वहां मौजूद पुलिस बल ने सक्रियता दिखाते हुए अभ्‍यर्थियों को बसों में भरकर धरना स्‍थल पर भिजवा दिया।

69 हजार शिक्षक भर्ती में बहकावे में न आएं युवा: सतीश द्विवेदी

बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि विभाग में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 18,598 पदों पर पूरी पारदर्शिता के साथ भर्ती की गई है, लेकिन कुछ शरारती तत्व और राजनीतिक दल युवाओं को बरगला कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सरकार की ओर से किसी भी विभाग में भर्ती के लिए जिन नियमों के तहत आवेदन मांगे जाते हैं, उन्हीं के तहत पूरी भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाती है, इसे न भर्ती प्रक्रिया के दौरान बदला जा सकता है और न ही भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद।

यह बातें उन्होंने अपने आवास पर आज पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता, आरक्षण और विशेष आरक्षण के सुसंगत नियमों का अनुपालन करते हुए बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया गया है। कुछ शरारती तत्वों और राजनीतिक दलों द्वारा जनपद आवंटन सूची और चयन की पूरी प्रक्रिया के बारे में तथ्यहीन एवं गलत आंकड़े प्रस्तुत कर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 18,598 पदों के सापेक्ष 31,228 अभ्यर्थियों की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से भर्ती हुई है। भर्ती प्रक्रिया में कोई भी संशोधन या बदलाव कानूनी रूप से संभव नहीं है, लेकिन तथ्यों को जानते हुए भी कुछ शरारती तत्व और दल महज अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। पिछले सवा चार साल के कार्यकाल में सरकार ने पारदर्शी तरीके से निष्पक्ष भर्तियां की हैं और आगे भी निष्पक्ष और पारदर्शी भर्तियां जारी रहेंगी।

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