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कारोबारी गतिविधियों में तेज सुधार के संकेत , रोजाना 19.77 लाख ई-वे बिल जेनरेट

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भारतीय अर्थव्यवस्था में कोरोना की दूसरी लहर से आई भारी गिरावट से बाहर निकलने का संकेत दिख रहा है। इसका अंदाजा जीएसटी के तहत जारी होने वाले ई-वे बिल से लगाया जा सकता है। जीएसटी नेटवर्क पोर्टल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जुलाई महीने की 18 तारीख तक रोजाना औसतन 19.77 लाख ई-वे बिल जेनरेट होते हैं। ये इस साल अप्रैल के औसत से भी ऊपर पहुंच गया है। यानी दूसरी लहर का असर खत्म होकर कारोबरी गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट आई हैं।

मई महीने के मुकाबले जुलाई महीने में ई-वे बिल जेनरेशन में साढ़े आठ फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। जुलाई महीने में अब तक कुल 3.55 करोड़ ई-वे बिल जेनरेट हो चुके हैं। वहीं, जून में 5.46 करोड़, मई में 3.99 करोड़, अप्रैल में 5.87 करोड़ और मार्च में जब रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह हुआ था उस समय 7.12 करोड़ से ज्यादा ई-वे बिल जेनरेट हुए थे। रोजाना औसत की बात की जाए तो मार्च के बाद जुलाई में सबसे ज्यादा रोजाना ई-वे बिल जनरेशन हो रहा है। मार्च में रोजाना 22.97 लाख, अप्रैल में 19.58 लाख, मई में 12.89 लाख और जून में ये 18.22 लाख ई-वे बिल जेनरेट किए गए थे।

रोजाना औसत ई-वे बिल

महीना ईवे बिल
मार्च 22.97 लाख
अप्रैल 19.58 लाख
मई 12.89 लाख
जून 18.22 लाख
*जुलाई
19.77 लाख (आंकड़े 18 तारीख तक)

मई में आई थी बड़ी गिरावट

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर मई के मध्य में अपने शिखर पर थी, तब न सिर्फ कारोबारी गतिविधियों में बल्कि जीएसटी संग्रह में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई। जून महीने में इकट्ठा किए गए जीएसटी के आंकड़े जुलाई में जारी हुए हैं जो पिछले साल अक्तूबर के बाद 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे फिसल गए थे। आंकड़ों के मुताबिक मई महीने में हुए कारोबार से सिर्फ 92,849 करोड़ रुपये का ही जीएसटी संग्रह हुआ था। उसके बाद से धीरे धीरे देश में न सिर्फ लॉकडाउन और लगी पाबंदियां हटाई जाने लगीं बल्कि कोरोबारी गतिविधियां भी सामान्य होनी शुरू हो गई थीं।

जुलाई में सुधारने की पूरी उम्मीद

कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने के बाद जुलाई में कारोबारी गतिविधियां सुधरने से उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले महीनों में सरकार की कमाई बढ़ सकती है। जानकारों की राय में जून और जुलाई महीने में स्थिर बढ़त ये बताती है कि अगर कोरोना की तीसरी लहर काबू में रहती है तो आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था में तेजी बनी रह सकती है। यह रोजगार से लेकर उद्योग जगत के लिए एक अच्छी खबर होगी। कंपनियों में कारोबारी गतिविधियों में सुधार से रोजगार के मौके बढ़ेंगे जो बेरोजगारी दर को कम करने का काम करेगा।

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