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पेगासस को लेकर SC में एक और याचिका, कहा- एक्ट ऑफ साइबर टेरररिज्म है ये, सरकार से पूछा जाए सवाल

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दो जाने माने पत्रकारों ने पेगासस जासूसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि सरकार से पूछा जाए कि क्या केंद्र या उसकी किसी एजेंसी ने पेगासस स्पाइवेयर के लिए लाइसेंस प्राप्त किया है या इसका इस्तेमाल भारतीय नागरिकों पर निगरानी करने के लिए किया है। द हिंदू ग्रुप के निदेशक एन राम और एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म के संस्थापक शशिकुमार बालकृष्ण मेनन की इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड या मौजूदा जज द्वारा जासूसी कांड की जांच की भी मांग की गई है।

‘एक्ट ऑफ साइबर टेरररिज्म’
वकील शादान फरासत द्वारा दायर याचिका में इस जासूसी कांड को “एक्ट ऑफ साइबर टेरररिज्म” करार दिया गया। इसमें कहा गया है, “ये हमला प्रथम दृष्टया साइबर-आतंकवाद का एक कार्य है। इसके तहत सरकार की संवेदनशील जानकारी रखने वाले उपकरण मंत्रियों, वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियों और संवैधानिक पदाधिकारियों को निशाना बनाया गया है।”

ये जासूसी मौलिक अधिकारों का हनन
याचिका में इजरायली फर्म एनएसओ ग्रुप द्वारा बनाए गए पेगासस सॉफ्टवेयर को बेहद संवेदनशील सैन्य सॉफ्टवेयर बताते हुए कहा गया है कि सैन्य-ग्रेड स्पाइवेयर का उपयोग करके इस तरह की सामूहिक निगरानी कई मौलिक अधिकारों का हनन करती है और स्वतंत्र संस्थानों में घुसपैठ और हमले का प्रयास करती है।

पेगासस पर पहले भी दर्ज हुई याचिकाएं
बता दें कि पेगासस को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं डाली गई हैं। हाल में इस जासूसी कांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है। राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने पेगासस का इस्तेमाल करके सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित तौर पर कार्यकर्ताओं, राजनेताओं, पत्रकारों और संवैधानिक पदाधिकारियों की जासूसी की रिपोर्ट की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे भी पहले अधिवक्ता एम एल शर्मा ने याचिका दायर कर मांग की थी कि न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच कराई जाए।

सड़क से संसद तक सुनाई दी पेगासस मामले की गूंज
दरअसल, मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल मंत्रियों, राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों सहित लगभग 300 भारतीयों पर निगरानी करने के लिए किया गया था, जिसके बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और इसकी गूंज सड़क से लेकर संसद तक सुनाई दी।

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