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मानसून में दूषित पानी बढ़ा सकता है हेपेटाइटिस ई का जोखिम, जानिए इस बारे में सब कुछ

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हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपिटाइटिस डे (World Hepatitis day) मनाया जाता है। इस माहमारी के दौर में वायरल हेपेटाइटिस की गंभीरता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए, इस बार की थीम (World Hepatitis Day 2021 Theme) है हेपेटाइटिस इंतजार नहीं करता (Hepatitis cant wait) । क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि हर 30 सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत इस गंभीर बीमारी की वजह से होती है। हेपेटाइटिस के पांच स्ट्रेन हैं ए,बी,सी,डी,ई। बरसात के मौसम (Rainy season) में सबसे ज्यादा फैलने वाला वायरस हेपेटाइटिस ई (Hepatitis E) है।

हेपेटाइटिस ई (Hepatitis E) कैसे फैलता है?
यह वायरस ऐसे पानी को पीने से फैलता है, जिसमें इस वायरस से संक्रमित लोगों के मल या विषयक पदार्थ मिले हुए होते हैं। यह वायरस कच्चे मीट जैसे पोर्क, वेनिशन आदि खाने से भी फैल सकता है।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के निदेशक और प्रमुख, डॉक्टर विकास सिंगला के अनुसार हेपेटाइटिस ई वायरस एक छोटा आरएनए (RNA) वायरस है। जो जीनोटाइप के आधार पर चार तरह का होता है। इन चार में से जीनोटाइप 1 और 2 मानव में संक्रमण (Human Illness) का कारण बनते हैं।

हेपेटाइटिस ई के कारण (Hepatitis E Causes)
हेपेटाइटिस ई (Hepatitis E) संक्रमण की संभावना बरसात के दिनों (Monsoon) में अधिक होती है, क्योंकि यह बीमारी गंदे पानी की वजह से फैलती है। बरसात के दिनों में जगह-जगह गंदे पानी के रुकने की या संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। जब यह संक्रमित पानी शरीर में जाता है तो लिवर इन्फेक्शन की वजह से संक्रमण फैलता है।
इसका एक और कारण संक्रमित भोजन भी है। खासकर कि यदि आप बरसात में सीफूड खाती हैं तो जरूर ध्यान रखें। हेपेटाइटिस ई (Hepatitis E) बीमारी का जोखिम सबसे ज्यादा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर खाने पीने से जुड़ी हुई है। गंभीर स्थिति में जान भी जा सकती है, लेकिन समय से इलाज करने पर बचाव संभव है।

हेपेटाइटिस ई का जोखिम किन्हें ज्यादा है?
अगर आप एक ट्रैवलर (Traveller) हैं या आपको ऐसी जगह जाना पड़ रहा हैं, जहां सेनिटेशन(Sanitation) अच्छे से उपलब्ध नहीं है, तो आपको हेपेटाइटिस ई वायरस हो सकता है।
क्या इस वायरस के कोई लक्षण होते हैं?
बहुत से लोगों को खास कर बच्चों में इस वायरस के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। लेकिन कुछ लोगों में 2-4 दिनों में निम्न लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

फीवर,
थकान
भूख न लगना,
उल्टियां आना
जी मिचलाना
पेट में दर्द होना
यूरिन का रंग थोड़ा डार्क हो जाना
स्टूल का क्ले जैसा रंग हो जाना
जोड़ों में दर्द होना
पीलिया जैसी स्थिति होना

हेपेटाइटिस ई कितना गंभीर है?
इस वायरस का सबसे अधिक खतरा गर्भवती महिलाओं को होता है, क्योंकि इसके कारण उनका लीवर डैमेज हो सकता है और उनकी मृत्यु भी हो सकती है।

जिन लोगों का ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ है या जिन लोगों की इम्युनिटी बहुत कमजोर है उन्हें इससे ठीक होने में अधिक समय लग सकता है और उन्हें लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं।

आप वायरस से संक्रमित हैं कैसे मालूम करेंगी
इसका पता केवल लैब में होने वाले टेस्ट के द्वारा ही लग सकता है। इसलिए अगर आपके हेल्थ केयर प्रोवाइडर आपको किसी प्रकार का टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं, तो आपको बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिए।

इस वायरस से आप कैसे ठीक हो सकती हैं?
इसका खास रूप से कोई उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन लक्षण धीरे-धीरे ठीक होने लगते हैं। इसलिए आपको लक्षणों का उपचार करना चाहिए और आप आसानी से इससे ठीक हो सकते हैं।
क्या हेपेटाइटिस ई से बचाव संभव है?
इससे बचाव के लिए अभी तक किसी प्रकार की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। हालांकि आप इस वायरस के रिस्क फैक्टर से बच सकती हैं –

आपको हमेशा साफ और प्योर पानी ही पीना चाहिए। ऐसी जगह न जाएं जहां सेनिटेशन उपलब्ध न हो
नॉन वेज फूड को अच्छे से पकाकर ही खाएं।
पब्लिक टॉयलेट कम यूज करें
पानी के फिल्टर की रॉड हर साल बदलवाएं
इस प्रकार आप इस वायरस से खुद को बचा सकती हैं।

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