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टेलीकॉम सेक्टर का संकट गहराया, क्या केवल Jio और एयरटेल ही रह जाएंगे बाजार में?

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भारत भले ही दुनिया के सबसे बड़े टेलीकॉम बाजारों के शुमार में है, लेकिन यह सेक्टर अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। देश में 4जी सेवा शुरू होने के बाद से दर्जनभर कंपनियां अपना कारोबार पहले ही समेट चुकी हैं। सरकारी कंपनी बीएसएनएल और एमटीएनल भी वित्तीय संकट से जूझ रही है। इससे अब तक लाखों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। अब भारी कर्ज के बोझ तले दबी कंपनी वोडाफोन-आइडिया (वीआईएल)के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने वीआईएल में अपनी हिस्सेदारी सरकार या किसी ऐसी इकाई को सौंपने की पेशकश की है। उन्होंने कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार जिसे समझती है, उसे कंपनी का परिचालन जारी रखने के लिए दे सकती है।
क्या केवल दो-तीन कंपनियां बचेंगी?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय टेलीकॉम सेक्टर एकाधिकार की तरफ बढ़ रही है। इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों का जो हाल है उससे स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में सिर्फ दो या तीन कंपनियां भी अपनी सेवाएं देंगी। टेलीकॉम सेक्टर में जियो के तेजी से हो रहे विस्तार के बीच महज एयरटेल ही बाजार में संघर्ष करती दिख रही है। वहीं, बीएसएनल अपनी अंतिम अवस्था में पहुंच चुकी है और वोडाफोन-आइडिया गहरे आर्थिक संकट में है।

भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया पर सबसे अधिक बोझ

दूरसंचार विशेषज्ञों का कहना है कि जियो आने के बाद टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। अपने साथ उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिए कंपनियों ने सस्ती दर पर कॉल और इंटरनेट उपलब्ध कराएं हैं। इससे कंपनियों का नुकसान बढ़ा है। वहीं, समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया पर सबसे अधिक बोझ पड़ा है। इससे एयरटेल को निकलने में सक्षम है लेकिन वोडाफोन-आइडिया के निकलना मुश्किल हो रहा है। इससे कंपनी की बंद होने की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि वीआईएल के ऊपर समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की कुल देनदारी 58,254 करोड़ रुपये है। इसमें से कंपनी 7,854.37 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है और उसपर अभी 50,399.63 करोड़ रुपये का बकाया है।

फंड जुटाने का प्रयास

वोडाफोन-आइडिया पिछले 10 महीनों से 25,000 करोड़ रुपये जुटाने का प्रयास कर रही है लेकिन अब तक उसकी कोशिशें नाकाम ही रही हैं। सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिलने से कंपनी की वित्तीय स्थिति तेजी से खराब हुई है। एनालिस्ट्स का कहना है कि टेलिकॉम मार्केट में जारी प्रतिस्पर्द्धा को देखते हुए कंपनी फिलहाल बहुत ज्यादा टैरिफ बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में अगर उसे सरकार की तरफ से कोई बड़ा राहत पैकेज नहीं मिला तो उसके लिए अपना वजूद बचाए रखना मुश्किल हो सकता है।

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