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दिल्ली हाईकोर्ट ने दी वर्चुअल विवाह पंजीकरण की अनुमति, कहा- वेब पोर्टल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अब आम हैं

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दिल्ली हाईकोर्ट ने विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) से आभासी उपस्थिति (Virtual Appearance) का समर्थन करते हुए शनिवार को कहा कि अब वेब पोर्टल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लगभग आदर्श बन गए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पार्टियों की आभासी उपस्थिति में विवाह को पंजीकृत किया जा सकता है और वर्तमान समय में नागरिकों को कानून की कठोर व्याख्या के कारण अपने अधिकारों का प्रयोग करने से रोका नहीं जा सकता है, जो “व्यक्तिगत उपस्थिति” का आह्वान करता है।

जस्टिस रेखा पल्ली ने अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय जोड़े की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यहां शादी का पंजीकरण कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शारीरिक उपस्थिति को अनिवार्य आवश्यकता नहीं मानने से पक्षकारों को आसानी से अपनी शादी का पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

जस्टिस पल्ली ने 9 सितंबर को अपने आदेश में कहा कि मुझे इस निष्कर्ष पर पहुंचने में कोई संकोच नहीं है कि पंजीकरण आदेश के खंड 4 में ‘व्यक्तिगत उपस्थिति’ शब्द को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुरक्षित उपस्थिति को शामिल करने के लिए पढ़ा जाना चाहिए। कोई अन्य व्याख्या, न केवल इस लाभकारी कानून के उद्देश्य को विफल कर देगी, यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के इस महत्वपूर्ण और आसानी से सुलभ उपकरण के उपयोग को भी कमजोर करेगा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली (विवाह का अनिवार्य पंजीकरण) आदेश, 2014 कल्याणकारी कानून है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए लागू किया है।

अदालत ने दंपति को अपने वकील/पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के माध्यम से विवाह के पंजीकरण के लिए आवेदन करने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पंजीकरण प्राधिकरण के समक्ष अपनी “व्यक्तिगत उपस्थिति” दर्ज करने की अनुमति दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों गवाह पंजीकरण प्राधिकारी द्वारा अधिसूचित तिथि पर अपने मूल पहचान पत्र के साथ पंजीकरण प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित होंगे। अदालत ने कहा कि प्राधिकरण विवाह को तेजी से पंजीकृत करेगा और आवेदन प्राप्त होने की तारीख से दो सप्ताह की अवधि के भीतर विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा।

गौरतलब है कि वर्तमान मामले में, दंपति ने दावा किया कि 2014 में विवाह पंजीकरण अनिवार्य किए जाने से पहले उनकी शादी हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। चूंकि दंपति विदेश में स्थानांतरित हो गया, इसलिए वह दिल्ली (विवाह का अनिवार्य पंजीकरण) आदेश, 2014 के तहत अपनी शादी को पंजीकृत नहीं करा पाया। यह देखते हुए कि विवाह प्रमाणपत्र के अभाव में ग्रीन कार्ड के लिए उनके आवेदन पर अमेरिका में विचार नहीं किया जा रहा, दंपति ने विवाह प्रमाण पत्र जारी करने के लिए यहां स्थानीय प्राधिकरण से संपर्क किया, जिसने कहा कि पक्षों की प्रत्यक्ष उपस्थिति अनिवार्य है।

आभासी उपस्थिति के लिए एसडीएम से किए गए आग्रह का जवाब न मिलने पर दंपति ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। दंपति के वकील ने कहा कि कई हाईकोर्ट ने विवाह पंजीकरण के लिए पक्षों की आभासी उपस्थिति की अनुमति देने के आदेश पारित किए हैं। वकील ने कहा कि कोविड-19 महामारी और कई देशों द्वारा लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए आभासी उपस्थिति की अनुमति दी जानी चाहिए।

हालांकि, दिल्ली सरकार के वकील ने तर्क दिया कि शादी के पंजीकरण की मांग करने वाले दंपति की प्रत्यक्ष उपस्थिति अनिवार्य है और यह प्रक्रिया वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नहीं की जा सकती क्योंकि इसके लिए “लाइव फोटो” लेने की आवश्यकता होती है।

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