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बिहार: इस साल बंगाल और यूपी के लोगों को नहीं मिलेगा पीरपैंती की मिर्ची का स्वाद, जानें क्यों

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बाढ़ और बारिश की वजह से इस बार पीरपैंती, कहलगांव, बाराहाट और गोपालपुर में लगी मिर्ची की फसल बर्बाद हो गई। करोड़ों का नुकसान होने से किसानों और व्यापारियों के सपने भी टूट गए। त्योहारी सीजन शुरू होने के बाद भी यहां के किसान और कारोबारी चुप बैठे हैं। पीरपैंती, कहलगांव और बाराहाट थोक मंडी में सन्नाटा है। व्यापारी भी मिर्ची के नुकसान की भरपायी नहीं करवा पा रहे हैं। वहीं मिर्ची की उपलब्धता को लेकर विभिन्न जिलों और राज्यों से व्यापारियों को फोन आ रहा है।

किसान और कारोबारी दिनकर राम बताते हैं कि दुर्गापूजा और दिवाली में मिर्ची की मांग बढ़ जाती है। हर दिन 25 ट्रक मिर्ची की सप्लाई होती थी। इस हिसाब से प्रतिदिन 300 टन मिर्ची बेतिया, मोतिहारी, गोरखपुर, देवरिया, रांची, बंगाल, असम और बांग्लादेश भेजी जाती थी। इन इलाकों के लोगों को इस बार यहां की मिर्ची का स्वाद नहीं मिल पाएगा। हाइब्रिड की तुलना में यहां की मिर्ची की वेरायटी सबसे अलग है।

किसान बताते हैं कि यहां की मिर्ची में तीखापन रहता है, बल्कि अन्य जगहों की मिर्ची से तीखापन खत्म हो गया है। ऐसी मिर्च का प्रयोग फ्लेवर के तौर पर नहीं किया जाता है। जिला कृषि पदाधिकारी केके झा ने बताया कि कहलगांव, पीरपैंती, बाराहाट सहित कई इलाके में मिर्ची की फसल बर्बाद हुई है।

छह साल पहले भी बर्बाद हुई थी मिर्ची की फसल
पीरपैंती के किसान मनोज महतो ने बताया कि पांच एकड़ में इस बार मिर्ची की फसल लगाई, मगर मार्च व अप्रैल से हो रही बारिश और फिर आयी बाढ़ से सारी फसल बर्बाद हो गई। 60 हजार से एक लाख रुपये तक की पूंजी बर्बाद हो गई है। राकेश कुमार यादव ने भी पांच एकड़ में एक लाख रुपये खर्च कर मिर्च की खेती की थी। राकेश ने बताया कि इस बार बेहतर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन शत-प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने कहा कि छह साल में दूसरी बार किसानों को झटका लगा है।

700 एकड़ में होती है खेती, 15 हजार किसान जुड़े
कहलगांव क्षेत्र में 700 एकड़ में मिर्ची की खेती होती है। 15 हजार के करीब किसान और मजदूर इससे जुड़े हुए हैं। इसके अलावा व्यापारी व अन्य लोग मिलकर मिर्च की खेती को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहुंचा रहे हैं। एक किसान ने बताया कि मार्च और अप्रैल में मिर्ची का पौधा लगाते है। वहीं जून से अक्टूबर तक फसल की बंपर पैदावार होती है। पिछले साल पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल तक मिर्च बिका था, मगर इस बार किसान के हाथ खाली हैं।

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