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ईरान में साइबर हमले से ईंधन की बिक्री प्रभावित

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ईरान में मंगलवार को बड़े पैमाने पर साइबर हमले से गैस स्टेशन प्रभावित हुए. इससे ईंधन की बिक्री पर बुरा असर पड़ा.ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पुष्टि की है कि मंगलवार को देश भर के गैस स्टेशनों पर साइबर हमले हुए, जिससे कुछ गैस स्टेशनों पर ईंधन की बिक्री बंद हो गई. हमले के कारण होर्डिंग पर संदेश बदल गए और ईंधन वितरित करने की सरकार की क्षमता को चुनौती दी. ईरान के प्रसारक आईआरआईबी के मुताबिक, “मंगलवार को साइबर हमले से गैस स्टेशनों की ईंधन भरने की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई. तकनीशियन समस्या को ठीक कर रहे हैं और जल्द ही ईंधन भरने का काम शुरू होगा” ईरान के तेल मंत्रालय ने कहा कि वह इस समस्या को सुलझाने के लिए एक आपात बैठक कर रहा है. टेलीविजन फुटेज में हमले के बाद गैस स्टेशनों पर लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं.

किसी भी समूह ने तत्काल हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. इसका मकसद जाहिर तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई की सर्वोच्चता को चुनौती देना है. होर्डिंग पर संपादित संदेश कुछ इस तरह थे: “खमेनेई! हमारा गैसोलीन कहां है?” एक अन्य बिलबोर्ड पर लिखा था, “जमरान गैस स्टेशन पर मुफ्त गैस!” ईरानी सुप्रीम काउंसिल में साइबरस्पेस के सचिव सैयद अब्दुल हसन फिरोजाब्दी ने देर रात एक संदेश में कहा कि साइबर हमलों को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं. ईरानी समाचार एजेंसी ने कहा कि हमले से देश भर में लगभग 1,400 गैस स्टेशन प्रभावित हुए हैं. अर्ध-आधिकारिक समाचार एजेंसी आईएसएनए ने इस घटना को साइबर हमला बताया. आईएसएनए ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा कि जब लोगों ने सरकार द्वारा जारी कार्ड से ईंधन खरीदने की कोशिश की, तो उन्हें “साइबर हमले 64411” संदेश मिलने लगे.

हालांकि, बाद में आईएसएनए ने अपनी वेबसाइट से इस खबर को हटा दिया और कहा कि वह खुद हैक हो गई है. इससे पहले जुलाई में ईरान के रेलवे सिस्टम को निशाना बनाकर इसी तरह के साइबर हमले में 64411 नंबर का इस्तेमाल किया गया था. यह नंबर खमेनेई नेई के कार्यालय द्वारा संचालित एक हॉटलाइन से जुड़ा है. ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण देश वर्तमान में गंभीर आर्थिक कठिनाई का सामना कर रहा है. अधिकांश ईरानी अपने वाहनों के लिए सरकारी सब्सिडी वाले ईंधन पर निर्भर हैं. फिरोजाब्दी ने कहा, “यह हमला संभवत: किसी विदेशी देश ने किया है.

किस देश द्वारा और किस तरह से यह घोषणा करना जल्दबाजी होगी” साइबर हमले ऐसे समय में हुआ जब देश दो साल पहले 2019 को ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का विरोध झेल चुका है. सरकार के इस कदम का विरोध करने के लिए ईरानी सड़कों पर उतर आए थे. मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक ईरानी सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे. ईरान पहले भी कई साइबर हमलों का शिकार हो चुका है. वह हमलों के लिए अमेरिका और इस्राइल को जिम्मेदार ठहराता आया है. एए/सीके (एएफपी, रॉयटर्स).

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