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‘लॉन्ग कोविड’ से महिलाएं होती हैं ज्यादा प्रभावित,विशेषज्ञों का दावा

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कोरोना संक्रमण के चलते अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों में लक्षणों के लंबे समय तक बरकरार रहने का खतरा 57 फीसदी ज्यादा होता है। चिकित्सकीय भाषा में ‘लॉन्ग कोविड’ कहलाने वाली यह स्थिति महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दुनिया के 17 देशों में हुए 40 अध्ययनों के विश्लेषण के बाद यह दावा किया है।

उन्होंने कहा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का वैश्विक स्तर पर 23.7 करोड़ से अधिक लोगों के सार्स-कोव-2 वायरस का शिकार होने का अनुमान है। इनमें से दस करोड़ से अधिक लोगों में कोविड से उपजी जटिलताओं के लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। शोधकर्ताओं ने चेताया कि ‘लॉन्ग कोविड’ से जूझने वाले मरीज स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर दबाव बढ़ने का सबब बन सकते हैं।

37 फीसदी पुरुष संवेदनशील
अध्ययन में महिलाओं को ‘लॉन्ग कोविड’ के प्रति अधिक संवेदनशील पाया गया। 49 फीसदी महिलाओं को कोविड संबंधी जटिलताओं से लंबे समय तक छुटकारा न मिलने की बात सामने आई, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 37 फीसदी के आसपास दर्ज किया गया। ‘लॉन्ग कोविड’ में मरीज के सार्स-कोव-2 वायरस की जद में आने के चार हफ्ते या उससे अधिक समय बाद भी संक्रमण से जुड़े पुराने या नए लक्षण बने रहते हैं।

जल्दी पीछा नहीं छोड़ते लक्षण
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से सितंबर में प्रकाशित एक अध्ययन में हर तीन में से एक कोविड मरीज के संक्रमण से उबरने के तीन से छह महीने बाद भी कम से कम एक लक्षण से जूझने की बात सामने आई थी। थकान, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, पाचन तंत्र संबंधी परेशानियों को सबसे आम लक्षण पाया गया था। इस अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल पीएलओएस मेडिकल’ में प्रकाशित किए गए थे।

कहां-कितनी मौजूदगी
क्षेत्र ‘लॉन्ग कोविड’ के शिकार मरीज
-एशिया : 49%
-यूरोप : 44%
-उत्तर अमेरिका : 39%

सबसे आम लक्षण
-थकान/कमजोरी : 11.8%
-खांसी : 10.9%
-सिरदर्द : 10.1%
-मांसपेशियों में दर्द : 7.7%
-स्वाद न महसूस होना : 6.4%
-सूंघने की शक्ति खोना : 6.3%
-गले में खराश : 6.3%
-सांस लेने में तकलीफ : 5.6%
-बुखार : 5.1%
-उल्टी/मिचली : 3.1%
-दस्त : 2.7%
-पेट दर्द : 2.4%
(स्रोत : अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच हुआ ओएनएस कोरोनावायरस इंफेक्शन सर्वे।)

क्या हैं कारण
-किंग्स कॉलेज लंदन के ‌विशेषज्ञों ने वायरस के छोटे-छोटे अंश मौजूद रहना बड़ी वजह बताया।
-प्रतिरोधक तंत्र के कमजोर या अति सक्रिय हो जाने की स्थिति में भी पुराने या नए लक्षण सताते हैं।
-कुछ अध्ययनों में वायरस के अंगों की कार्यप्रणाली को बदलने की बात सामने आई, चयापचय क्रिया के प्रभावित होने से भी बढ़ती है समस्या।

इन बातों का ख्याल रखें
-सामान्य जीवन में धीरे-धीरे लौटें, शरीर को भरपूर आराम दें।
-थकाऊ, बोझिल कामों को टुकड़ों-टुकड़ों में बांटकर निपटाएं।
-प्राथमिकताएं तय करें, जो काम टल सकते हैं, उन्हें पूरा करने की हड़बड़ी न पालें।

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